स्थानांतरण पर भावभीनी विदाई

कौशल जीवन की संचित निधि व स्वावलंबन का आधार : दिलीप तन्मय

लालसोट। राजस्थान पुलिस सेवा के अधिकारी दिलीप तन्मय ने कहा कि कौशल हमारे जीवन की संचित निधि की तरह होते हैं, जिनका आवश्यकता पड़ने पर कभी भी उपयोग किया जा सकता है। वे शुक्रवार को राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय लालसोट में राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाइड एवं अनुराग सेवा संस्थान, लालसोट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित निःशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण शिविर के अवलोकन के दौरान संबोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गुल्लक में एक-एक रुपया जमा कर भविष्य के लिए संचित किया जाता है, उसी प्रकार धीरे-धीरे सीखे गए कौशल भी जीवन में समय आने पर अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं तथा जीविकोपार्जन का माध्यम बन सकते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य उमा शंकर शर्मा ने कहा कि कौशल विकास प्रशिक्षण शिविर बालक-बालिकाओं को स्वावलंबन की दिशा में प्रेरित करते हैं। ग्रीष्मावकाश के दौरान बच्चों के समय का सदुपयोग कराने की यह पहल अनुकरणीय है।शिविर प्रभारी महेंद्र साहू ने बताया कि शिविर में योग शिक्षा, आत्मरक्षा, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, नृत्य, मेहंदी एवं ब्यूटिशियन सहित विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दक्ष प्रशिक्षकों द्वारा दिया जा रहा है। शिविर में 180 से अधिक बालक-बालिकाएं भाग ले रहे हैं।

संस्थान सचिव श्याम सुन्दर शर्मा ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्थान की स्थापना के 31 वर्ष पूर्ण होने पर “अनुराग-31” अभियान के अंतर्गत 31 विभिन्न सेवा कार्य आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्काउट गाइड संगठन की इच्छा होने पर संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष ऐसे निःशुल्क कौशल विकास शिविर आयोजित किए जा सकते हैं।संस्थापक संयोजक सियाराम शर्मा ने आभार व्यक्त किया तथा मंच संचालन श्रीकान्त शर्मा ने किया।इस अवसर पर आरपीएस अधिकारी दिलीप तन्मय के अलवर स्थानांतरण पर अनुराग सेवा संस्थान की ओर से दुपट्टा, साफा एवं शाल ओढ़ाकर तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर भावभीनी विदाई दी गई।
कार्यक्रम में संस्थान अध्यक्ष अंशुल सोनी, पूर्व पार्षद चिराग जोशी, घर-घर तुलसी अभियान समन्वयक अविनाश रिवाली, अनुराग शिक्षा पूर्णता अभियान समन्वयक अनुराग तिवाड़ी, श्रीमती निर्मला पारीक, श्रीमती सुनीता, सुश्री पायल सैनी, राधा खाण्डल, उमेश पहाड़िया, कोमल शर्मा एवं खुशी सैनी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
