घास री रोटी खाई, पण आजादी न गँवाई”महाराणा प्रताप जयंती पर गूंजा राष्ट्रभक्ति का स्वर,

“घास री रोटी खाई, पण आजादी न गँवाई”महाराणा प्रताप जयंती पर गूंजा राष्ट्रभक्ति का स्वर,

बच्चों ने सीखे स्वाभिमान और सेवा के संस्कार

अनुराग सेवा संस्थान लालसोट एवं राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड जिला मुख्यालय दौसा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में महाराणा प्रताप जयंती उत्साह, उमंग और देशभक्ति के वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने महाराणा प्रताप के आदर्शों को जानने और अपनाने का संकल्प लिया।राजस्थान बाल साहित्य अकादमी के संस्थापक सदस्य डॉ. अंजीव अंजुम ने शिविरार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन त्याग, संघर्ष, स्वाभिमान और राष्ट्रप्रेम का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने बच्चों से अपने जीवन में साहस, सत्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर प्रशिक्षक अनन्या ने महाराणा प्रताप के प्रिय हाथी रामप्रसाद से जुड़ा प्रेरक संस्मरण सुनाकर बच्चों को वीरता और निष्ठा का संदेश दिया। वहीं विष्णु कुमार शर्मा ने ओजपूर्ण गीत प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति से सराबोर कर दिया।शिविरार्थियों ने गीत, कविता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से महाराणा प्रताप के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। बच्चों द्वारा बनाई गई आकर्षक रंगोलियों ने सभी का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ओजस क्लासेस, दौसा द्वारा स्थापित महाराणा प्रताप एवं विजय स्तंभ की भव्य छवियों से सुसज्जित सेल्फी प्वाइंट रहा। यहां बच्चों में फोटो खिंचवाने का विशेष उत्साह देखने को मिला और उन्होंने उत्साहपूर्वक स्मृति चित्र लिए।ओजस क्लासेस के निदेशक उत्कर्ष नारायण ने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारण, नियमित अध्ययन और सकारात्मक सोच का महत्व बताते हुए कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। निरंतर परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प ही सफलता की कुंजी हैं।

प्रभारी एवं प्रधानाचार्य कमलकांत शर्मा ने बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को वृक्षारोपण, जल संरक्षण तथा प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।कार्यक्रम में दिनेश कुमार महावर, योग शिक्षक नरेश शर्मा, शिखा, गरिमा शर्मा, कैलाश स्वर्णकार, दिलीप सांवरिया, महेश बेरवा, शारदा खंडेलवाल, श्याम प्रकाश उपाध्याय, माहेन्द्री शर्मा, बृजमोहन कानपुरा, कृष्णकांत, प्रकाश सैनी, रानी खंडेलवाल, विदिता सैनी, आशा सैनी एवं कुलदीप सिंह सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के समापन पर शिविर संयोजक डॉ. संजीव कुमार रावत ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, राष्ट्र और स्वाभिमान के साथ कभी समझौता नहीं करना चाहिए। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलने का आह्वान करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।

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