
नन्हे सपनों ने थामा साहित्य का दीप, 51 बाल हस्तों ने रचा सृजन का स्वर्णिम अध्याय।
मथुरा। जब नन्हे हाथों ने पुस्तकों को स्पर्श किया तो वह केवल लोकार्पण का क्षण नहीं था, बल्कि नई पीढ़ी के मन में साहित्य, संस्कार और सृजन के बीज रोपने का प्रेरक उत्सव बन गया। अनुराग सेवा संस्थान, लालसोट के 32वें स्थापना वर्ष पर आयोजित “अनुराग-31” की अंतिम कड़ी के अंतर्गत मथुरा के राया स्थित केडी किड्स जोन विद्यालय में साहित्य का ऐसा अभिनव समारोह साकार हुआ, जहाँ 51 नन्हे-मुन्ने बच्चों ने वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अंजीव अंजुम की 51 पुस्तकों का लोकार्पण कर ज्ञान और संस्कृति के प्रति अपनी आत्मीय श्रद्धा व्यक्त की। उल्लेखनीय है कि डॉ. अंजीव अंजुम अब तक 250 से अधिक पुस्तकों का सृजन कर साहित्य जगत को समृद्ध कर चुके हैं।

मुख्य अतिथि डॉ. सत्यव्रत सिंह, सहायक निदेशक, दूरदर्शन मथुरा ने कहा कि डॉ. अंजीव अंजुम का साहित्य समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। उन्होंने अनुराग सेवा संस्थान द्वारा पिछले 32 वर्षों से शिक्षा, साहित्य, समाजसेवा और मानवीय मूल्यों के क्षेत्र में किए जा रहे सतत कार्यों को प्रेरणास्पद बताते हुए कहा कि बच्चों के हाथों पुस्तक लोकार्पण जैसी पहल नई पीढ़ी को ज्ञान और संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री हुकम सिंह, डायरेक्टर, केडी पब्लिक स्कूल ने संस्था की सेवा-यात्रा की सराहना की। विशिष्ट अतिथि प्रभात चौधरी, निदेशक, केडी किड्स जोन, राया ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में अध्ययन के प्रति रुचि, संस्कार और साहित्य के प्रति सम्मान का भाव विकसित करते हैं।अपने उद्बोधन में डॉ. अंजीव अंजुम ने कहा कि अनुराग सेवा संस्थान की 32 वर्षों की यह यात्रा केवल सेवा का इतिहास नहीं, बल्कि समाज में ज्ञान, संवेदना और सकारात्मक परिवर्तन का सतत अभियान है। साहित्य तभी सार्थक होता है, जब वह नई पीढ़ी के हाथों तक पहुँचे और उनके जीवन का संस्कार बने।

समारोह में विनीत गोयल एवं संतोष ऋचा ने अतिथियों का स्वागत किया। सभी 51 बाल प्रतिभागियों का तिलक, माल्यार्पण एवं मिठाई वितरण के साथ सम्मान किया गया। उपस्थित अतिथियों ने संस्थापक संयोजक सियाराम शर्मा, सचिव श्यामसुंदर शर्मा तथा दौसा समन्वयक डॉ. संजीव रावत को संस्था के 32वें वर्ष में प्रवेश पर शुभकामनाएँ देते हुए उनके सेवा, साहित्य और संस्कार के सतत अभियान की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

कार्यक्रम के अंत में प्रभात चौधरी ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर पुस्तक लोकार्पण करने वाले 51 नन्हे-मुन्ने प्रतिभागियों ने यह संदेश दिया कि यदि बचपन को साहित्य का सान्निध्य मिले, तो भविष्य संवेदनशील, संस्कारित और सृजनशील बनता है। यह आयोजन वास्तव में साहित्य, संस्कार और बाल चेतना का अविस्मरणीय उत्सव बन गया।



