ब्रज भाषा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसकी साहित्यिक परंपरा अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली – विधायक गोपाल शर्मा

जयपुर। राजस्थान दिवस के अवसर पर जवाहर कला केंद्र में आयोजित ब्रज महोत्सव मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष के प्रेरणादायक उद्बोधनों के साथ भव्य रूप से प्रारंभ हुआ और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर एक यादगार आयोजन बन गया। कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी और पोद्दार संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि ब्रज भाषा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसकी साहित्यिक परंपरा अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रही है। उन्होंने कहा कि यह भाषा हमारी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और ऐसे आयोजन इसके संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी की सचिव डॉ. लता श्रीमाली ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रज महोत्सव का उद्देश्य समाज में ब्रज भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, इसके साहित्यिक स्वरूप को सुदृढ़ करना और रचनाकारों को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में प्रदेशभर से आए कवियों और साहित्यकारों को एक मंच प्रदान कर सम्मानित किया गया, जो अकादमी के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उद्बोधनों के पश्चात कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक गणेश वंदना के साथ हुआ, जिससे वातावरण आध्यात्मिक और मंगलमय हो उठा। इसके बाद “पधारो मारो देश” राजस्थानी लोक नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आगे चलकर मयूर नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिए और कलाकारों की अभिव्यक्ति ने खूब सराहना बटोरी।महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण फूलों की होली रही, जिसमें पुष्पों के रंगों से सजी इस प्रस्तुति ने पूरे परिसर को उत्सवमय बना दिया। उपस्थित दर्शकों ने इस अनूठे आयोजन का भरपूर आनंद लिया।कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ब्रजभाषा कवियों का कवि सम्मेलन रहा। इस दौरान विभिन्न कवियों ने भक्ति, श्रृंगार और लोकजीवन से जुड़े विषयों पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कवियों की सशक्त अभिव्यक्ति और प्रभावशाली प्रस्तुति ने सभी को देर तक बांधे रखा।इस अवसर पर ब्रजभाषा के प्रतिष्ठित कवियों एवं साहित्यकारों का सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया।

सम्मानित होने वालों में किशनवीर यादव, अंजीव अंजुम, नरेंद्र ‘निर्मल’, डॉ. रेखा गुप्ता, तारावती सैनी ‘नीरज’, भगवान सहाय पारिक, नरेंद्र कुमार शर्मा ‘बब्बू ब्रजवासी’, श्रीमती पूजा उपाध्याय, गोविन्द ब्रजवासी, , कमल सिंह, दूल्हीचंद लोढ़ा, राधाकिशन सैनी, ’, जगदीश मोहन रावत, डॉ. सुशीला शील, गौरव गोस्वामी एवं डॉ. सावित्री रायजादा शामिल रहे।इस अवसर पर सुरेश मिश्रा, मुख से घुंघरू की ध्वनि निकालने के लिए प्रसिद्ध शंकर गर्ग, ग्लोबल ब्रज फोरम के सदस्य, कथक गुरु सुमन यादव, विभिन्न स्कूल एवं कॉलेजों के शिक्षक तथा अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

वहीं पोद्दार संस्थान के चेयरमैन डॉ. आनंद पोद्दार ने कहा कि ब्रज भाषा और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से इस महोत्सव का आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत की गई, जिसमें मयूर नृत्य, फूलों की होली और अन्य लोक प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण रहीं।महोत्सव में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में कवि, साहित्यकार, कलाकार, शोधकर्ता और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया। इस आयोजन के माध्यम से ब्रज भाषा के संरक्षण, संवर्धन और साहित्यिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई गई।-

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