बाल साहित्य बच्चों के बौद्धिक और रचनात्मक विकास की आधारशिला सीमा


बाल मन की जिज्ञासा को स्वर देता संग्रह : ‘पहेली पहेली खेले’

लालसोट। शब्द जब बच्चों की दुनिया में उतरते हैं तो वे केवल कविता नहीं रहते, वे जिज्ञासा, कल्पना और सीख का उत्सव बन जाते हैं। इसी भाव को साकार करता साहित्यकार संतोष ऋचा का बाल कविता संग्रह ‘पहेली पहेली खेले’ अनुराग सेवा संस्थान, लालसोट के एक सादगीपूर्ण एवं गरिमामय समारोह में लोकार्पित किया गया।

तहसीलदार सीमा घुणावत ने पुस्तक का विमोचन करते हुए कहा कि बाल साहित्य बच्चों के बौद्धिक और रचनात्मक विकास की आधारशिला है। ऐसे काव्य संग्रह बाल मन में प्रश्नों की चिंगारी जगाते हैं और कल्पनाशीलता को नए आयाम देते हैं। उन्होंने कहा कि पहेलियों और कविताओं के माध्यम से बच्चों में सीखने की सहज ललक पैदा होती है।

नगर परिषद की निवर्तमान सभापति पिंकी चतुर्वेदी ने संतोष ऋचा के साहित्यिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बाल साहित्य के माध्यम से नई पीढ़ी को संवेदनशीलता, संस्कार और सृजनात्मक सोच से जोड़ने का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर अंजना त्यागी, चेतना बंशीवाल, कमला शर्मा, डॉ. प्रिया भारती, विनीत उपाध्याय, सुरेंद्र जांगिड़, योग गुरु सुरेश शर्मा, राजेश शर्मा, अंशुल सोनी, श्याम सुंदर शर्मा, प्रियंका चौधरी, डॉ. अंजीव अंजुम, श्रीकांत शर्मा, रेखा सैनी, रुबी पारीक, डॉ. निर्मला शर्मा, डॉ. संजीव रावत, लोकेश शर्मा, दीपक सुकार, राजेंद्र डोब, गिर्राज सेडूलाई, अविनाश रिवाली, सुनील गुप्ता, अतुल होदायली, रघु मिश्रा, विकास गौतम, गोपाल टापरिया, ओम प्रकाश पारीक, अनुराग तिवाड़ी, महेंद्र साहू, अक्षय तिवाड़ी और हेमंत कुमार सहित अनेक महिलाएं और पुरुष मौजूद रहे।

कार्यक्रम की जानकारी संस्थान के प्रेस सचिव अनिल नीमला ने दी।

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