पाटोत्सव ब्रजभाषा समारोह का भव्य शुभारंभ


नाथद्वारा में देशभर के साहित्यकारों का संगम, ब्रजभाषा और हिंदी के साधकों का हुआ सम्मान

साहित्य मंडल श्रीनाथद्वारा के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय पाटोत्सव ब्रजभाषा समारोह का शुभारंभ अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुआ। समारोह की अध्यक्षता करते हुए विद्वान मनीषी पंडित मदन मोहन शर्मा ने कहा कि “मेवाड़ ने ब्रजभाषा को अपने हृदय में स्थान दिया है। श्रीनाथद्वारा ब्रज नगरी है, जहाँ ब्रजराज श्रीकृष्ण श्रीनाथजी के रूप में विराजमान हैं।”देशभर से पधारे साहित्यकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह दृश्य ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो संपूर्ण भारत से एक-एक पुष्प आज श्रीनाथजी के चरणों में अर्पित हो रहा हो। उन्होंने साहित्यकारों के सम्मान को मां सरस्वती की कृपा बताते हुए कहा कि “संसद में पहुँचाने वालों को जनता चुनती है, किंतु साहित्य मंच पर सम्मानित होने वाले साहित्यकारों का चयन स्वयं मां सरस्वती करती हैं।”

साहित्य मंडल साहित्य-तीर्थ के रूप में

प्रतिष्ठितकार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री रामेश्वर दयाल महेरे, नगर पालिका अध्यक्ष सौरोंजी (कासगंज, उत्तर प्रदेश) ने कहा कि साहित्य मंडल ने हिंदी के साथ-साथ ब्रजभाषा के संवर्धन में देशभर में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने श्री भगवती प्रसाद देवपुरा एवं श्याम प्रकाश देवपुरा को इस कार्य के लिए समर्पित जीवन जीने वाला बताते हुए कहा कि साहित्य मंडल आज केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में “साहित्य तीर्थ” के रूप में जाना जाता है।

विशिष्ट अतिथि साहित्यकार प्रेम पाल शर्मा ने कहा कि जहाँ अनेक सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाएँ ब्रजभाषा को लेकर निष्क्रिय हैं, वहीं साहित्य मंडल वर्षों से ब्रजभाषा की परंपरागत विधाओं को जीवंत बनाए हुए है।वहीं रामेश्वर दयाल शर्मा ‘रामू भैया’ ने कहा कि हजारों साहित्यकारों को सम्मानित कर चुकी यह संस्था आज भी ब्रजभाषा कवि सम्मेलनों के माध्यम से ब्रजभाषा को मुख्यधारा में स्थान दे रही है।

वंदनाओं से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत दौसा के कवि अंजीव रावत द्वारा गणेश वंदना, सुश्री माद्री सिंह द्वारा सरस्वती वंदना, भरतपुर के कवि हरिओम हरि द्वारा ब्रज वंदना तथा वृंदावन के कवि सत्यप्रकाश शर्मा द्वारा ब्रज वंदना से हुई।

ब्रजभाषा विभूषण सहित अनेक सम्मान प्रदान

ब्रजभाषा साहित्य, कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान हेतु डॉ. बृजभूषण चतुर्वेदी ‘दीपक’, गोपाल कृष्ण दुबे, चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार, चंद्रभान शर्मा ‘चंचल’, डॉ. राजीव शर्मा निष्प्रय, डॉ. रामेंद्र कुमार शर्मा ‘रवि’, कुलभूषण सोनी, भगवान सिंह पौनिया, डॉ. अनिता चौधरी एवं लोकेश गोस्वामी को ‘ब्रजभाषा विभूषण’ की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया।इसके साथ ही हिंदी भाषा सेवा के लिए मानक तुलसीराम गौड, डॉ. गिरवर गिरी, डॉ. कुंवर शिवदान सिंह, श्रीमती रितु चतुर्वेदी एवं सुश्री प्रेरणा शर्मा को विविध साहित्यिक सम्मानों से सम्मानित किया गया।

ब्रजभाषा उपनिषद एवं पत्र-वाचन

ब्रजभाषा उपनिषद कार्यक्रम के अंतर्गतडॉ. बृजभूषण चतुर्वेदी – सूरदास के काव्य में दर्शनगोपाल कृष्ण दुबे – कुंभनदास के काव्य में दर्शनहरिओम हरि – गोविंददास के काव्य में दर्शनश्रीमती संतोष रिचा राया – नंददास के काव्य में दर्शनविषयों पर विद्वतापूर्ण आलेख प्रस्तुत किए गए।—

द्वितीय सत्र :

ब्रजभाषा भारतीय आत्मा की वाणी

द्वितीय सत्र की अध्यक्षता आगरा के वरिष्ठ साहित्यकार शिव सागर शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि “ब्रजभाषा वह भाषा है जिसने भगवान कृष्ण को बोलना सिखाया और जिसमें सर्वाधिक साहित्य रचा गया।”मुख्य अतिथि चेतन स्वामी (बीकानेर) ने साहित्य मंडल को भारतवर्ष के साहित्य पुष्पों का उपवन बताया, वहीं तमिलनाडु के एम. श्रीधर ने इसे भारतीय एकता और अखंडता का सशक्त उदाहरण कहा।

कृतियों का विमोचन एवं स्मृति सम्मान

इस अवसर पर अनेक साहित्यिक कृतियों का विमोचन किया गया। साथ ही चेतन स्वामी को ब्रजकांत साहित्य सम्मान तथा एम. श्रीधर को कमला देवी अग्निहोत्री स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया।इसके अतिरिक्त अनेक साहित्यकारों को विभिन्न स्मृति सम्मानों, हिंदी साहित्य विभूषण, हिंदी साहित्य मनीषी, हिंदी काव्य मनीषी एवं समाज सेवा कला सेवा रत्न की मानद उपाधियों से विभूषित किया गया।सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और समापनकार्यक्रम में उदयपुर की रेणु गोर एवं साथी कलाकारों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं।

समस्त कार्यक्रम का संचालन साहित्य मंडल के प्रधानमंत्री श्याम प्रकाश देवपुरा ने किया। साहित्यकारों का गद्यात्मक एवं पद्यात्मक परिचय हरिओम हरि, नरेंद्र ‘निर्मल’ एवं डॉ. अंजीव अंजुम द्वारा प्रस्तुत किया गया।समारोह में देशभर से आए अनेक साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे पाटोत्सव ब्रजभाषा समारोह एक ऐतिहासिक साहित्यिक आयोजन के रूप में स्मरणीय बन गया।—

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