“अनुराग-31 में पसीने को सलाम: जब मजदूर बने दिन के असली हीरो”

पसीने की महक को मिला सम्मान, सेवा और संवेदना से सराबोर रहा दिन

लालसोट। तपती धूप और कठिन परिश्रम के बीच जीवन यापन करने वाले श्रमिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस इस बार यादगार बन गया। अनुराग सेवा संस्थान, लालसोट द्वारा आयोजित ‘अनुराग-31’ श्रृंखला के अंतर्गत कार्यक्रम ने न केवल उनके श्रम को सम्मान दिया, बल्कि उन्हें अपनत्व और सम्मान का एहसास भी कराया।

गणगौर मेला मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में जब श्रमिकों के माथे पर मंगल तिलक लगाया गया और उन्हें आदरपूर्वक उत्तरीय भेंट किए गए, तो माहौल भावनाओं से भर उठा। जिन हाथों की मेहनत से शहर की इमारतें खड़ी होती हैं, उन्हीं हाथों को सम्मानित होते देख हर किसी के चेहरे पर गर्व और संतोष झलक रहा था।

संस्थान की संरक्षिका अंजना त्यागी ने अपने संबोधन में कहा that श्रम मानव जीवन का आधार है। मेहनत ही व्यक्ति को सफलता और सुखमय जीवन की ओर ले जाती है तथा बिना परिश्रम के कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।

वहीं अनुराग सेवा संस्थान, लालसोट के संयोजक सियाराम शर्मा ने श्रमिकों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि मजदूरों का पसीना ही विकास कार्यों की असली नींव है और उनके बिना प्रगति की कल्पना अधूरी है। उन्होंने संस्थान की सामाजिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए पिता-विहीन बेटियों के विवाह का दायित्व निभाने जैसी सेवाओं को भी साझा किया।

कार्यक्रम की विशेष पहल ‘अनुराग परिंडा अभियान’ रही, जिसके तहत भीषण गर्मी में पक्षियों के लिए पेयजल की व्यवस्था हेतु परिंडे लगाए और वितरित किए गए। न्यू कॉलोनी सहित विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिंडे लगाए गए, जिसमें आमजन का भी उत्साहजनक सहयोग देखने को मिला। संस्थान ने यह भी बताया कि जो व्यक्ति नियमित रूप से पक्षियों के लिए पानी भरने का संकल्प लेगा, उसे नि:शुल्क परिंडे उपलब्ध कराए जाएंगे।

कार्यक्रम के दौरान श्रमिकों और संस्थान के सदस्यों ने साथ बैठकर अल्पाहार ग्रहण किया, जो समानता, सम्मान और भाईचारे का प्रतीक बना। इस अवसर पर नेपाल त्यागी, कार्यक्रम समन्वयक मंगलराम प्रजापत, सुनील सूरतपुरा, दीपक सुकार, राजेंद्र डोब, अध्यक्ष अंशुल सोनी, उपाध्यक्ष मनोज भट्ट, उपसचिव अजय हटीका सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि श्रम के सम्मान, सेवा की भावना और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया, जिसने समाज को यह संदेश दिया कि सच्ची प्रगति श्रमिकों के सम्मान से ही संभव है।

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