चर्चित कृति के लिए अमर बानिया लोहारो को ‘बाबा नीलकंठ अनुराग साहित्य सम्मान’

सिक्किम के साहित्यकार को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान

को उनकी चर्चित कृति के लिए ‘बाबा नीलकंठ साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान द्वारा आयोजित मातृ-पितृ पूजन दिवस समारोह के दौरान प्रदान किया गया। समारोह में शिक्षा, साहित्य और प्रशासन से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।

विशिष्ट अतिथियों ने सराहा साहित्यिक योगदान

कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक , वरिष्ठ शिक्षाविद एवं साहित्यकार तथा शिक्षाविद विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों ने लोहार के साहित्यिक अवदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका लेखन सामाजिक संवेदनाओं, लोकजीवन और सांस्कृतिक विविधता को गहराई से अभिव्यक्त करता है।

सम्मान स्वरूप मिला प्रशस्ति-पत्र और नकद राशि

सम्मान के तहत उन्हें प्रशस्ति-पत्र, शाल-दुपट्टा, स्मृति-चिह्न और ₹3100 की नकद राशि प्रदान की गई। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी और नेपाली दोनों भाषाओं में उनका सृजन कार्य भाषाई और सांस्कृतिक सेतु का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

दो भाषाओं में सशक्त रचनात्मक उपस्थिति

लोहार की नेपाली भाषा में अब तक सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जबकि हिंदी में उनकी कृतियाँ पाठकों के बीच व्यापक रूप से सराही गई हैं। उन्हें देशभर की लगभग दो दर्जन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

संस्थान के संस्थापक ने बताया कि उनकी रचनाओं का प्रसारण , और से नियमित रूप से होता रहा है, जिससे वे व्यापक दर्शक-श्रोता वर्ग तक पहुँचे हैं।

अभिनय के क्षेत्र में भी पहचान

साहित्य के साथ-साथ अमर बनिया लोहार एक कुशल अभिनेता के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्होंने कई नेपाली नाटकों, फिल्मों और हिंदी वृत्तचित्रों में प्रभावशाली अभिनय किया है, जिसे दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

कार्यक्रम के अंत में साहित्यिक समन्वयक ने कहा कि सिक्किम की साहित्यिक परंपरा को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में लोहार जैसे रचनाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है और उनका सम्मान युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगा।

समारोह में सत्यनारायण आंकड़, श्रीकांत शर्मा, डॉ संजीव रावत, संतोष रिचा, अनुराग शर्मा, राजेंद्र डॉब सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एक्सप्लोर विद्यालय के प्रधानाचार्य श्रीकांत शर्मा ने किया, जबकि अंत में संस्थान के सचिव श्याम सुंदर शर्मा और अध्यक्ष अंशुल जैन ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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